ज्योतिषियों के सामने प्राय: ऐसा प्रश्न बार-बार आता है की एक ही शहर में एक ही समय पैदा हुए बालकों का भविष्य प्राय: अलग -अलग क्यों होता है !उनका भविष्य एक ही होना चाहिऐ क्योंकि उनकी जन्मकुंडली एक जैसी बनती है और ग्रह का प्रभाव भी एक जैसा है तो यह अंतर क्यों ? ऐसी जिज्ञासा होना स्वाभाविक भी है !ऐसा होना भी चाहिए परन्तु नही होता है क्यों ? मेरा ऐसा मानना है की किसी भी व्यकित के भविष्य निर्धारण में निम्न तथ्यविशेष भूमिका निभाते हैं ..............
१ पूर्व जन्म के कर्म --हमारी संस्क्र्ती पुनर्जन्म को मानती है !हम ऐसा मानते हैं की व्यक्ति जन्म लेता है और आयु पूर्ण होने पर मर जाता है वह पुन: जन्म लेता है और फिर मर जाता है ! प्रकर्ति में यह नियम चलता रहता है !उस व्यक्ति द्वारा किए गएशुभाशुभ कर्मों का फल उस व्यक्ति को भोगना पड़ता है और इसी के अनुसार वह सुख -दुख का अनुभव करता है !यदि व्यक्ति की आयु लम्बी है तो वह इसी जन्म में यह पा लेता है और कभी-कभी अगले जन्म में पाता है !इसी कारणऐसा देखा जाता है किएक ही माता -पिता से जन्म लेने वाले दो भाइयों के लालन -पालन में भी अंतर होता है !पहले बालक के जन्म समय माता -पिता अभावों में रहते हैं और दुसरे बालक के जन्म समय तक वे सम्पन्न हो जाते हैं ,क्यों ? इस जन्म में पहले बालक ने तो क्या बुरा किया और दुसरे बालक ने क्या अच्छा किया जो यह अंतर हुआ ? जरुर कोई कारण है जिसने यह अंतर किया ! में समझता हूँ कि यह पूर्व जन्म के कर्मों का ही फल है !
२ गर्भ समय माता के विचार -आचरण का प्रभाव -किसी भी व्यक्ति के भविष्य निर्धारण में जब वह माता के गर्भ मेंथा ,उस समय माता के आचार -विचार का उस पर बहुत प्रभाव पड़ता है !माता क्या सोचती है ,किस वातावरण में रहती है इन सब बातों का बालक पर प्रभाव पड़ता है !अभिमन्यु का चक्र वेधन माता के गर्भ में सीखना इस बात का प्रमुख उदाहरण है !इसी प्रकार जब हम परिवार के रोते बालक को गोद में लेते हैं तो वह चुप हो जाता है जबकि दूसरा लेता है तो वह रोता रहता है !क्योंकि वह बालक जब गर्भ में था उस समय से वह हमारी आवाज सुन रहा है और अपने को परिचित में मानता है !
३ जन्म समय ग्रह प्रभाव - बालक जब जन्म लेता है कोई ग्रह किस अवस्था में है इस बात का भी उस पर प्रभाव पड़ता है !ग्रह के उच्च ,नीच अस्त आदि का बालक पर प्रभाव पड़ता है !अपनी अवस्था के अनुसार ही ग्रह बालक को अपने तत्वों से लाभ देता है या वंचित कर देता है !इन ग्रह प्रभावों से ही बालक का आचरण ,स्वभाव ,कार्यशैली बनती है !
४ vaastu प्रभाव उक्त बातों के अलावा बालक पर समाज ,वातावरण एवम भोगोलिक प्रभाव भी पड़ता है ! इसे ही वास्तु प्रभाव कहते हैं !उच्च परिवार का संस्कारवान बालक के ख़राब वातावरण में रहने पर उसके बिगड़ jane के avasr bn jate हैं !