Saturday, May 24, 2008

ज्योतिष की बुराई

ज्योतिष की बुराई करना हम हिन्दुस्तानियो से सीखा जा सकता है !कुछ लोग अपने को ज्यादा पढ़ा लिखा मन कर अपनी संस्कृति को पिछड़ा एवम दकियानूसी मान कर उसकी खिल्ली उड़ना अपनी शान समझते है !आधुनिकता एवम पाश्चात्य प्रभाव के चलते अपने को भारतीय कहलाना भी उनको शर्मसार लगता है!बड़ी-बड़ी चर्चा आयोजित की जाती है,विज्ञान दी दुहाई दी जाती है!ज्योतिष विज्ञान है या नही इस पर तर्क-वितर्क किया जाता है!चर्चा मे चार-पांच वैज्ञानिक जिन्होंने कभी ज्योतिष नही पढा एक ऐसे व्यक्ति से जो शायद ख़ुद भी पूरी तरह ज्योतिष नही जानता है से तर्क-वितर्क करते हैं !उसे तरह -तरह के बचकाने, बिना आधार के सवाल मे उलझा कर अपनी विद्य्वता साबित कर शास्त्रों को मिथ्या साबित कर दिया जाता है!ये चार -पांच उन लोगों की गुटबाजी है जिन्होंने कभी खुली बहस का आयोजन नही किया ,विषय के जानकारों को आमंत्रित नही किया ,जिस के बारें मे वे ख़ुद नही जानते ,कभी पढा नहीं और अपनी विद्व्यता दिखा कर उस शस्त्र को कपोल -कल्पित साबित करने का प्रयास करते हैं जिसका लोहा आज पूरी दुनिया मान चुकी है और मान रही है शास्त्र वर्णित ज्ञान को विदेशों में अपना कर उसका पेटेंट करवाया जा रहा है ! ये लोग जाहिर रूप में ज्योतिष दी बुराई करते हैं और निजी जीवन में समस्या आने पर सबसे पहले ख़ुद ही ज्योतिष के पास भागते हैं !हम भारतीय हैं और हमारी दरोहरों को समझे उन के गूढ़ रहस्यों को जाने और दैनिक जीवन में प्रयोग कर परिणाम के आधार पर ही कोई निर्णय लें केवल दो-चार अति आधुनिक,भारत में जन्म लेकर अपने को शर्मसार मानने वालें के आधार पर नहीं ! जय भारत